लोगों को कल्याण व मुक्ति की राह दिखाने के नाम पर बाप-बेटे किशोरियों से बलात्कार करते रहे और लोग उनके समक्ष नतमस्तक होते रहे। जय राम जी की।
आज भी किन्हीं मंघाराम जी का फोन आता है। बेहद गुस्से में हैं। कहते हैं बापू के बारे में ऐसी खबरें मत छापिए। यह झूठ है, उन्हें बदनाम करने की साजिश है। मंघाराम जी आस्था से भरे हुए हैं। ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं लगते। धर्म व अध्यात्म के बारे में उनका ज्ञान अंधश्रद्धा से शुरू होता है और वहीं खत्म हो जाता है। तर्क व सोच-विचार के सवाल पर उखडऩे लगते हैं। कहना चाहता हूं कि झांसाराम और फांसाराम जैसे लोगों को बलात्कारी बनाने में आप जैसे लोगों का बहुत बड़ा हाथ है, लेकिन कह नहीं पाता। बुजुर्ग हैं, व्यथित हैं। उनके मन को और ठेस पहुंचाना ठीक नहीं।
सच तो यह है कि इन दोनों ने इस देश में सदियों से संचित, पोषित, पूजित संस्कृति के साथ बलात्कार किया है, आस्था को लूटा है, आशा और विश्वास को ठगा है। दुनियाभर में 425 से अधिक आश्रम खोल दिए, 50 से अधिक गुरुकुलों की स्थापना कर दी और देश में हजारों एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। वाह रे! झांसाराम।
अभी भी ऐसे लोग हजारों की संख्या में (हो सकता है लाखों में हों) हैं जो झांसाराम को अपना उद्धारक मानने के लिए बेताब हैं। उधर, झांसाराम भी देश के सबसे महंगे वकील के सहारे बच निकलने की कोशिश में हैं। झांसाराम को एक बार रू-ब-रू सुनने का मौका मिला था, तेल-फुलेल बेचनेवाले एक मदारी से ज्यादा कुछ नहीं लगे। उन्हें पांच मिनट भी सुनना मुश्किल लगा। उनके भक्तों में कुछ ऐसे लोग भी मिले जो मानते हैं कि उनकी दुकान इन्हीं के आशीर्वाद से ही चल रही है या उनका कारोबार इन्हीं की कृपा से ही चल रहा है। जय राम जी की।
ऐसे लोग उन्हें बापू कहते हैं। बापू शब्द का ऐसा अवमूल्यन। ऐसे लोग हजारों की संख्या में हैं जो शब्दों की बाजीगरी, भाव-विह्वल होकर रोने-धोने की कला में माहिर हैं। लोगों के भोलेपन और अंधश्रद्धा के सहारे अपनी दुकान चमकाए जा रहे हैं। खुद अपनी राह का पता नहीं, दूसरों को भक्ति व ज्ञान की राह पर धकेल रहे हैं। अंधा अंधा ठेलिया दोनों कूप पड़ंत। जिस देश ने विश्व को गीता जैसा प्रकाश दिया, वहां ऐसी अंधेर। इतना घना अंधेरा। श्रीकृष्ण, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध, संत कबीर, मीरा, नानक की भूमि पर ऐसे महिषासुर कब तक पैदा होते रहेंगे। मां दुर्गा इस बार दशहरा पर ऐसे राक्षसों का समूल सफाया करें और हमें विवेक दें। हमारी विवेकहीनता ही ऐसे लोगों की राह आसान करती है और जो इनसान कहलाने के काबिल भी नहीं हैं वे भगवान कहलाने लगते हैं।
विजयदशमी की ढेर सारी शुभकामनाएं।