Saturday, May 30, 2009

कुछ sher

हर लफ्ज़ एक महकता गुलाब है
लहजे के फर्क से इसे तलवार मत बना।
कतील शिफाई.

2 comments:

  1. बिलकुल सही कतील साहब !

    ReplyDelete
  2. वाह!
    इसे साझा करने के लिए आभार!

    ReplyDelete